एक समय की बात है, जब एक आदमी एक नगर में रहता था। उसका नाम रामु था। रामु को अपनी आदत के कारण सभी लोग प्यार से 'बंदर' कहते थे। रामु के घर पास एक जंगल था जिसमें बहुत सारे बंदर रहते थे।
एक दिन, रामु को जंगल के बंदरों की चीखों से परेशानी हो गई। वे रातों-रात भी नहीं सो पा रहे थे। रामु ने निश्चित किया कि उसे इस समस्या का समाधान निकालना होगा। उन्होंने तत्परता के साथ एक योजना बनाई।
रामु ने एक बड़ी संख्या में पेड़ों के फल खरीदे और उन्हें जंगल में ले गए। फिर वह एक उच्च ऊंचाई पर एक बड़ा बर्तन रखा। बर्तन के नीचे वह फल रख दिए। जैसे ही उसने बर्तन को हिलाया, फल नीचे गिर गए।
जंगल के बंदरों ने रामु की इस चाल पर ध्यान दिया। वे बहुत खुश हुए और फलों की ओर दौड़ पड़े। जब उन्होंने बर्तन को हिलाना चाहा, उन्हें पता चला कि यह बर्तन उनसे बड़ा है और वे उसे उठा नहीं सकते।
रामु ने इस समय अपनी अगुआई दिखाई और उसने एक बड़ा ट्रैप तैयार किया। उसने एक बड़ी खाली जगह पर एक जाल बिछाया और उसके नीचे फल रख दिए। उसने फलों के बगीचे के असपताल में एक निशान लगाया, जिसमें लिखा था, "यहां इलाज होता है, लेकिन ट्रैप आगे है।"
जब बंदरों ने उसे देखा, तो उन्होंने उसे जानबूझकर इग्नोर किया और फलों की ओर दौड़ पड़े। जब वे जाल के पास पहुंचे, तो वे उसे पकड़ने की कोशिश करने लगे, लेकिन ट्रैप में उठाने में असमर्थ थे।
रामु बहुत खुश हुए क्योंकि उसकी योजना कामयाब हो गई। उसने बंदरों के लिए एक छोटा गेट खोला और उन्हें आजादी दी। बंदर बहुत खुश हुए और रामु की मदद के लिए आभार व्यक्त किया।
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि अक्सर हमारी समस्याओं का समाधान उसी की देन में छिपा होता है जिसे हम देखने के लिए समय नहीं निकालते। बंदरों ने भी खुद को पकड़वाने के लरामु के चालों में आ गए और उसे बचाने के लिए अपनी जान की परवाह नहीं की। इस कहानी से हमें यह संदेश मिलता है कि हमेशा जानबूझकर और नीतिवत्ता से काम करना चाहिए, क्योंकि अच्छाई हमेशा उच्च मान्यता प्राप्त करती है।